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वाराणसी : पूर्वांचल में रेलवे की ठेकेदारी में मुन्ना बजरंगी का पूरा दखल था। रेलवे की ठेकेदारी करने वाले जिस ठेकेदार ने मुन्ना बजरंगी को चढ़ावा नहीं चढ़ाया, चाहे व कोई भी हो रेल मंत्रालय से भी जुडा ही क्यों न हो,उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। कहा जाता है कि ठेकेदार ठेके मिलते ही मुन्ना बजरंगी को चढ़ावा चढ़ा देता था, इसके बाद ही वह काम शुरू कर पाता था। पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित के भाई ने ऐसा नहीं किया था। इसी कारण उससे रंगदारी मांगी गई थी। यही रंगदारी बजरंगी की मौत का सबब बन गई।

पूर्वांचल में रेलवे की अरबों रुपये ठेकेदारी में माफियाराज चलता है। रेलवे की ठेकेदारी में मुन्ना बजरंगी का वर्चस्व दशकों से था। बागपत के बसपा के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित के भाई नारायण दीक्षित भी रेलवे में ठेकेदारी करते हैं। पिछले साल उसने भी बनारस में रेलवे का एक बड़ा ठेका लिया और काम शुरू कर दिया। करोड़ों रुपये का ठेका लेने के बाद भी नारायण दीक्षित ने मुन्ना बजरंगी से संपर्क नहीं किया। इससे नाराज मुन्ना के गुर्गो ने उनसे संपर्क किया, तय रंगदारी देने की धमकी दी। नारायण ने उनकी बात नहीं मानी।

इस पर 22 सितंबर 2017 को नारायण से मुन्ना बजरंगी के नाम से सुल्तान ने रंगदारी मांगी। इस मामले में बसपा विधायक ने 25 सितंबर 2017 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। बसपा विधायक का भाई भी बनारस में रेलवे का ठेका लिया था, ठेका लेने के बाद लगातार मुन्ना बजरंगी की ओर से रंगदारी मांगी जा रही थी। इस मामले में आरोपित सलमान को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि सलमान के अनुसार मुन्ना बजरंगी का रंगदारी से कोई नाता नहीं था। टेलीफोनिक वायस की जांच में भी वह आवाज मुन्ना बजरंगी की नहीं निकली थी, लेकिन लोकेश के बयानों के अनुसार रंगदारी मांगने में बजरंगी का ही हाथ था। इसे लेकर पुलिस लगातार बजरंगी की कोर्ट में पेशी का प्रयास कर रही थी। आखिर इस मामले में पेशी पर बागपत जेल में आए मुन्नी बजरंगी को जान से हाथ धोना पड़ा।

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