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गाजीपुर : में भाजपा का  विधान सभा 2017 में लाज कौन बचा पाय़ेगा या मोदी के सहारे ही नैया पार लगाने मे लगें हैं भाजपा के नेता भईया.

आप को बताते चलते हैं कि रेल राज्यमंत्री जी के बारें में इलहाबाद विश्वबिदालय के पूर्वछात्र संघ के नेता ने यह बताया कि रेल राज्यमंत्री का राजनित का गजब ही टेष्ट हैं. भाजपा के अन्दर अपने कद के नेताओं का राजनितीक सुफडा ही साफ कर देतें हैं.

जमानियां विधान सभा में आम लोगों का कहना हैं कि पूर्व मंत्री को चुनाव जिताने के लिए शारदा चौहान जी को टिकट नहीं दिया गया.शारदा चौहान जी जमानियां से  विधायक व मंत्री भी रह चुकी है. शारदा जी को भाजपा के अन्दर रेल राज्यमंत्री के कद के कदावर नेता के रूप में मानी जाती हैं. भाजपा कि क्या ऐसी मजबूरी है कि शारदा जी जैसी नेताओं को पार्टी से टिकट नहीं दिया जाता हैं.  सदर विधान सभा में अरूण सिंह भाजपा के कदावर  नेता के रूप में माने जाते थे.

अरूण सिंह के बारे में कहा जाता है कि भाजपा कि जब नाव पर कोई बैठना नहीं पसन्द करता था, उस समय अरूण सिंह 40-45 हजार ओट पाकर चूनाव हार जाते थे. 2014 के लोकसभा में भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के अश्वासन के बाद भी टिकट न मिलने पर अरूण सिंह भाजपा छोड़ बागी हो गये. उसके बाद से सदर विधान सभा से बहुत लोग प्रत्याशी के रूप में सामने आये लेकिन भाजपा के टिकट के बितरण के बाद भाजपा में माना विरोध का लहर ही पैदा हो गया. सदर विधान सभा से उसे प्रत्याशी बनाया गया है जो पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ रही. गाजीपुर के 2017 विधान सभा के चुनाव मे अंसारी बन्धु के बसपा में आने से और अरूण सिंह जैसे नेताओं के विरोध से लग रहा है कि भाजपा व सपा का लगभग सूफडा साफ होता हुआ नजर आ रहा हैं. भाजपा गाजीपुर के विधान सभा में सफलता पाती है तो निश्चित रूप से इसका योगदान  रेल राज्यमंत्री को जायेगा. भाजपा का गाजीपुर से सूफडा साफ होगा तो इसके लिए कौन भाजपा का नेता हार कि जिमेंदारी अपने माथे लेगा.....

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