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कई महीनों के अंतराल के बाद अचानक देश की आबोहवा में राष्ट्रीयता की गूंज फिर से सुनाई देने लगी है. पिछले महीनों में इसकी गूंज तब सुनाई दे रही थी जब दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाये गये थे. तब वहां के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी और रिहाई के दौरान पूरा देश दो खांचों में बंटा नजर आ रहा था. पहला देशद्रोही और दूसरा तथाकथित देशभक्त. इसी दरम्यान भारत माता की जय के नारों से भी पूरे देश का माहौल पूरी तरह सराबोर था.

उतने जोर शोर से तो नहीं लेकिन, कमोबेश वैसा ही माहौल इन दिनों भी देखने को मिल रहा है. खासकर हिन्दी बेल्ट में. जब बुरहान वानी की सेना के मुठभेड़ में मौत हुई उस समय मैं इलाहाबाद में था. चारों तरफ सेना की उपबल्धियों की चर्चा चल रही थी. विश्वविद्यालय के छात्र हों या फिर पान की दुकान पर जमा लोग...यहां तक की पनेरी और चाय वाले भी...सबकी जुबान पर सेना की उपलब्धियों के बखान थे. सफलता बड़ी थी ही. लेकिन, हैरान करने वाली बात तो ये है कि अगले दो दिनों में ही सेना की सफलता की चर्चा पीछे छूट गयी.

बुरहान की मौत के बाद घाटी के अशांत होने का जो अंदेशा उमर अब्दुल्ला ने लगाया था हुआ भी कुछ वैसा है...घाटी से आ रही खबरों के बाद लोगों की प्रतिक्रियायें बदलती गयीं. वे जिस सेना की सफलता की चर्चा में मशगूल थे अब फिर से उनकी जुबान पर देशद्रोही और राष्ट्रभक्त जैसे शब्द पिरो गये थे. छात्र, कामकाजी लोग और हर कोई ये बताने में जुटा था कि किस तरह पूरा कश्मीर गद्दारों से भरा है. सेना की राष्ट्रीयता के बखान तो कोई नयी बात नहीं है लेकिन, बुरहान की मौत और उसके बाद घाटी में अशांति के बाद लोगों की हर प्रतिक्रिया में राष्ट्रवाद झलकने लगा है. मुसलमानों को देशद्रोही और खुद को राष्ट्रभक्त बताने की बारी फिर आ गयी है.

अचानक से घाटी में सेना को इतनी बड़ी सफलता का मिल जाना महज संयोग नहीं हो सकता. कहीं ना कहीं इस घटना की प्रतिक्रिया का अंदेशा केन्द्र सरकार को भी रहा होगा. लेकिन, भाजपा को ये जरूर पता होगा कि घाटी में अशांति के बाद पूरे देश में तथाकथित राष्ट्रवाद की लहर फिर उठ पड़ेगी. हो भी रहा है. इसीलिए मैं बुरहान की मौत को यूपी से जोड़कर देख रहा हूं. यूपी में महज कुछ महीनों बाद ही विधानसभा के चुनाव होने हैं. यूपी के चुनावी नतीजे सीधे तौर पर मोदी सरकार को प्रभावित करने वाले होंगे.(साभार : भड़ास4मीडिया)

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