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गाजीपुर : जिले के सीएमो आफिस की कुछ अजब कहानी है. सूत्रों कि माने तो सीएमो आफिस में एक ठेकेदार व एक फार्मास्सिट की ही चलती है. ठेकेदार के घर पर सीएमो आफिस के बराबर आफिस चलती है. फार्मास्सिट का यह दबदबा है कि वह लगभग 14 सालो से संम्बध हो कर मलाईदार जगह पर बना हुआ है. बात यही पर नहीं खत्म होती है जिस जगह पर ये फार्मास्सिट काम करते है वे उसके योग्य नहीं है.

उसके बाद भी 14 सालो के अन्दर किसी भी सीएमो में यह दम नहीं हुआ कि एक योग्य फार्मास्सिट को योग्य जगह पर रखा जाए. इस जगह का नाम है मुख्य औषधि भण्डार गाजीपुर. इस भण्डार से पूरे जनपद को दवाईया सप्लाई दी जाती है.

जब सीएमो साहब से इसके बारे में पुछा गया तो उन्होनें कहा कि सीबीआई के डर से मुख्य औषधि भण्डार में लोग डियूटी नहीं करना चाह रहे है. डियूटी के लिए आदेश कर देने के बाद भी फार्मास्सिट मंत्री  के यहा से दबाव बनवा रहे है कि हमे यहा से दूसरी जगह भेज दिया जाए. दबंग फार्मास्सिट के बारे में जब पूछा गया तो उन्होनें कहा कि सीबीआई जांच के डर से वे यहां काम नहीं करना चाह रहे है. सीबीआई का जांच ऐसा है कि हम इनको और कही नहीं भेज पा रहे है क्योकि सीबीआई बार-बार अपने जांच में इन्ही को बुलाती रहती है. 

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